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खनिज संसाधन MINERALS RESOURCES ( CH – 51 )

खनिज संसाधन ( MINERALS RESOURCES)
– भारत खनिज संपदा की दृष्टि से एक समृद्ध राज्य है। भारत में प्रत्येक तरह का खनिज पाया जाता है।
– खनिज तीन प्रकार के होते हैं –
1- धात्विक खनिज – 2 प्रकार –
1- लौह खनिज –  लौह अयस्क, मैगनीज, निकेल, क्रोमियम, कोबाल्ट, टंगस्टन
2- अलौह खनिज – सीसा, जस्ता, तांबा, बॉक्साइट, प्लेटिनम
2- अधात्विक खनिज
3- ऊर्जा खनिज/ईंधन खनिज – कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, आण्विक खनिज(ur)
– समुद्र संसाधनों के भंडार होते हैं विभिन्न देशों को उनके आसपास के समुद्रों में अधिकार देने के लिए 1982 में संयुक्त राष्ट्र के देशों ने मिलकर एक समझौता किया है जिसे unclos (united nation convention of the law of sea)
कहा जाता है। इस समझौते के अंतर्गत विभिन्न देशों को उनके तटरेखा अर्थात आधार रेखा से समुद्र में 200 समुद्री मील तक अधिकार दिया गया है जिसे अनन्य आर्थिक क्षेत्र कहा जाता है।(eez)

कोई भी देश अपने तटरेखा से 200 nm तक संसाधनों का दोहन कर सकता है।

– किसी भी देश के तट रेखा के आसपास स्थित छिछले समुद्र को अपतट कहते हैं। भारत अपने तटरेखा से 200 nm (EEZ) तक के अपतटीय क्षेत्र से संसाधनों का दोहन कर सकता है।




अपतट खनिज संसाधनों के भंडार होते हैं।

– मुंबई हाई मुंबई के पास अरब सागर में स्थित एक अपतटीय क्षेत्र है। इसी प्रकार गोदावरी कृष्णा के मुहाने पर स्थित रावा अपतट में पेट्रोलियम का भंडार है।

हमारे देश में धात्विक, अधात्विक तथा ईंधन खनिज (कोयला) अधिकांशत मुख्य भूमि से ही निकाले जाते हैं। ईंधन खनिज में कोयला भी मुख्य भूमि से निकाला जाता है लेकिन ईंधन खनिजों में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस का अधिकतर भाग हमारे देश में अपतट से निकाला जाता है।
Ex – हमारे देश में कुल पेट्रोलियम उत्पादन का 60% से भी अधिक भाग अरब सागर में स्थित अपतटीय क्षेत्र मुंबई हाई से होता है।
– अपतटीय क्षेत्र प्राकृतिक गैस के भी भंडार होते हैं।

भारत में सर्वाधिक प्राकृतिक गैस मुंबई हाई से निकाला जाता है।

– संविधान के अनुसार मुख्य भूमि के खनिज संसाधनों ( MINERALS RESOURCES) में राज्य सरकारों का अधिकार होता है लेकिन अपतटीय क्षेत्र के खनिज संसाधनों पर केंद्र सरकार का अधिकार होता है। यही कारण है कि अपतटीय क्षेत्र के खनिज उत्पादन को किसी भी राज्य के खनिज उत्पादन में नहीं जोड़ा जाता।
Ex – मुंबई हाई के खनिज उत्पादन को महाराष्ट्र राज्य में नहीं दर्शाया जाएगा।
Ex – देश में सर्वाधिक पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र मुंबई हाई है लेकिन सर्वाधिक पेट्रोलियम उत्पादक राज्य गुजरात है।
– यदि देश के कुल खनिज उत्पादन के मूल्य को जोड़ा जाए तो सर्वाधिक खनिज उत्पादन मूल्य ईंधन खनिजों का होता है। ईंधन खनिजों में भी सबसे ज्यादा खनिज मूल्य पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस का होता है।
– जहां पेट्रोलियम पाया जाता है वहां प्राकृतिक गैस भी पाया जाता है।
– अपतटीय क्षेत्र के बाद राज्य में सर्वाधिक खनिज उत्पादन मूल्य उड़ीसा राज्य का है तथा इसके बाद झारखंड है।
– भारत में भारतीय खनिजों में सबसे ज्यादा हिस्सा लोहे का है ।

– वही देश के कुल खनिज उत्पादन मूल्य को मुख्य भूमि और अपतटीय क्षेत्र की दृष्टि से देखा जाए तो हमारे देश के तटीय क्षेत्र के खनिज उत्पादन का मूल्य देश के किसी भी राज्य की तुलना में सर्वाधिक है।




भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा लोहा उत्पादक देश है।


– भारत में प्रत्येक खनिज एक निश्चित चट्टानी संरचना में पाया जाता है।
Ex – लोहा, मैगनीज, तांबा, जस्ता, सोना, चांदी, निकेल, क्रोमियम, धारवाड़ युगीन चट्टान में पाया जाता है।
– चूना पत्थर ,बलुआ पत्थर, विंध्यन क्रम की चट्टान में।
– कोयला गोंडवाना क्रम की चट्टानों में।
– पेट्रोलियम टर्शियरी क्रम की चट्टानों में (अवसादी चट्टानों में)
– भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में बहुत सी खनिज पेटियाँ हैं लेकिन छोटानागपुर खनिज पेटी सर्वाधिक समृद्ध है।- लोहा, बॉक्साइट, मैगजीन, क्रोमियम, जस्ता, etc यही कारण है कि छोटा नागपुर पठार को “भारत का रूर प्रदेश”° कहते हैं या “भारतीय खनिज का हृदय”

हमारे देश का अधिकतर खनिज संसाधन ( MINERALS RESOURCES) प्रायद्वीपीय भारत के पठारी संरचना में पाया जाता है जबकि उत्तर भारत का मैदान खनिज संपदा की दृष्टि से निर्धन है।

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