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तिलहन फसलें OIL CROP PRODUCTION IN INDIA (CH – 45)

तिलहन फसलें

– जिन फसलों से तेल निकाला जाता है उन्हें तिलहन फसल कहते हैं।
Ex – सोयाबीन, मूंगफली, सरसों, सूरजमुखी नारियल, कुसम
– हमारे देश में तिलहन फसलों की खेती अनुपजाऊ भूमि तथा वर्षा की कमी वाले क्षेत्रों में की जाती है।
– क्षेत्रफल की दृष्टि से खाद्यान्न फसलों के बाद तिलहन का ही स्थान है।

तिलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है।

– सरसों रबी की फसल है जबकि मूंगफली और सोयाबीन खरीफ ऋतु की फसल है।
– भारत में तिलहन फसलों में सर्वाधिक उत्पादन सोयाबीन का होता है तथा इसके बाद मूंगफली का होता है।
– मूंगफली एक स्वपरागित फसल है अर्थात दूसरे फलों से इसका परागण नहीं होता है यह स्वतः परागित हो जाती है।

– सरसों के तेल में 64% लाइनोलीक अम्ल होता है जो कोलेस्ट्रॉल साफ करता है।

– सरसों के तेल में तीखापन iso thiocynate के कारण होता है।
– सरसों में एरूसिक अम्ल पाया जाता है जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
– कुसुम के तेल का इस्तेमाल वाटर प्रूफ कपड़े के निर्माण में और चमड़े के प्रिजर्वेशन में होता है।

तिलहन उत्पादन में अग्रणी राज्य

– कुल तिलहन           – मध्यप्रदेश
– सोयाबीन                – मध्यप्रदेश
– मूंगफली                  – गुजरात
– सरसों                      – राजस्थान
– सूरजमुखी               – कर्नाटक
– नारियल                   – तमिलनाडु
– कुसुम                      – महाराष्ट्र

फसलों में पोषण स्तर

– चावल    – 6% प्रोटीन, 76% कार्बोहाइड्रेट
– गेहूँ         – 15% प्रोटीन, 65% कार्बोहाइड्रेट
– मक्का     –  ”       ”     , 80% कार्बोहाइड्रेट
– सोयाबीन – 45% प्रोटीन, 20% तेल
– मूँगफली   – 30% प्रोटीन
– मक्का शीतोष्ण जलवायु का फसल है।
– सोयाबीन तिलहन और दलहन दोनों फसलों की श्रेणी में आता है।

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