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पेट्रोलियम Petroleum (Ch-60)

  पेट्रोलियम टर्शियरी युग अर्थात तृतीयक युग के अवसादी चट्टानों में मिलता है। अवसादी चट्टानों का निर्माण आग्नेय चट्टानों के कट छट कर समुद्र में परत-दर-परत बिछ जाने से होता है इसलिए अवसादी चट्टानों को परतदार चट्टान भी कहते हैं। इन अवसादी चट्टानों में समुद्री जीवों के हड्डियां दब गई तथा एक लंबे समय काल के बाद चट्टानों के उच्च दाब अर्थात दबाव एवं ताप के कारण कीचड़ के रूप में परिवर्तित हो गई जिसे पेट्रोलियम कहा जाता है।
 जहां चट्टान के नीचे पेट्रोलियम पाया जाता है वहीं पर पेट्रोलियम के ऊपर प्राकृतिक गैस पाया जाता है।
– पेट्रोलियम हाइड्रोकार्बन ज्वलनशील पदार्थ यौगिकों का मिश्रण है हाइड्रोकार्बन में 70% तेल और 30% प्राकृतिक गैस मिलती है।
– भारत में पेट्रोलियम उत्पादन में अपतटीय क्षेत्र का योगदान 66% है।
– भारत ही नहीं बल्कि एशिया में सर्वप्रथम पेट्रोलियम उत्पादन 1867 में असम के माकुम क्षेत्र में किया गया। माकुम में ही देश का पहला तेल कुआं खोदा गया लेकिन यह छोटे स्तर पर था।
भारत में पेट्रोलियम उद्योग की शुरुआत 1889 में हुई जब असम के डिगबोई में दूसरा तेल कुआं खोदा गया।
– आजादी के बाद देश के संभावित तेल भंडारों का पता लगाने के लिए 1956 में तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग (ongc) की स्थापना की गई तथा 1994 में इसका नाम बदलकर तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम कर दिया गया।
– 1959 में तेल भंडारों का पता लगाने के लिए ऑयल इंडिया लिमिटेड (oil) की स्थापना की गई।
– विदेशों में तेल भंडार का पता लगाने के लिए ONGC के सहायक के रूप में ONGC विदेश लिमिटेड (ONGCVl) की स्थापना 1965 में की गई।
– ONGCVL भारत की सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय निगम है जो 17 देशों के 21 तेल परियोजनाओं में शामिल है।
देश के प्रमुख तेल क्षेत्र
भारत में प्रमुख रूप से चार तेल क्षेत्र हैं।
1- असम या ब्रह्मपुत्र घाटी तेल क्षेत्र
2- गुजरात तट तेल क्षेत्र
3- पश्चिमी अपतटीय तेल क्षेत्र
4- पूर्वी अपतटीय तेल क्षेत्र
असम या ब्रहमपुत्र घाटी तेल क्षेत्र
– भारत का सबसे पुराना तेल क्षेत्र
– भारत में सबसे पहले तेल की ड्रिलिंग असम के माकुम में की गई तथा इसके बाद देश के दूसरे तेलुगु में की ड्रिलिंग 1889 में डिगबाई में की गई।
– असम के अंतर्गत चार प्रमुख तेल क्षेत्र 
1- डिगबोई
2- नाहरकटिया
3- हुगरिजन मोरान
4-  सुरमाघाटी
गुजरात तट तेल क्षेत्र
– गुजरात तट तेल क्षेत्र के अंतर्गत 5 क्षेत्र हैं।
1- खंभात, 2-अंकलेश्वर, 3- कलोल, 4- सानंद
5- लुनेज क्षेत्र
पश्चिमी अपतटीय तेल क्षेत्र
– भारत का सबसे बड़ा एवं सबसे अधिक संपन्न तेल क्षेत्र।
– इसके अंतर्गत दो प्रमुख तेल क्षेत्र हैं।
1- मुम्बई हाई तेल क्षेत्र – खोज – 1976
– मुंबई हाई तेल क्षेत्र अरब सागरीय अपतटीय क्षेत्र में मुंबई से 176 km दूरी पर स्थित है।
– देश के कुल तेल उत्पादन का 60% भाग अर्थात देश का सर्वाधिक तेल उत्पादक क्षेत्र पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र है तथा पश्चिमी अपतटीय क्षेत्र के अंतर्गत मुंबई हाई है।
2- बसीन तेल क्षेत्र- बसीन तेल क्षेत्र अरब सागरीय अपतटीय क्षेत्र में मुंबई हाई के दक्षिण पश्चिम क्षेत्र में स्थित है।
पूर्वी अपतटीय तेल क्षेत्र
– भारत का सबसे नया तेल क्षेत्र
– गोदावरी कृष्णा डेल्टा के मुहाने पर बंगाल की खाड़ी के अपतटीय क्षेत्र में रावा अपतट तेल क्षेत्र की खोज हाल ही में हुई है।

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