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अरब सागर में जल गिराने वाली की नदियां (अध्याय -18 भारत का भूगोल )

अरब सागर में जल गिराने वाली दक्षिण भारत की नदियों का क्रम उत्तर से दक्षिण की ओर इस प्रकार है-

– लूनी
– साबरमती
– माही
– नर्मदा
– तापी
– मांडवी
– जुआरी
– सारावती
– गंगावैली
– पेरियार
– भरतपुरवा

– प्रायद्वीपीय भारत की 4 नदियां साबरमती, माही, नर्मदा, तापी खंभात की खाड़ी में गिरती हैं।

– प्रायद्वीपीय भारत की लूनी नदी समुद्र तट तक नहीं पहुंच पाती है समुद्र तट पर पहुंचने से पहले ही कच्छ के रण में विलीन हो जाती है।

– रण का अर्थ दलदल होता है।
– नर्मदा एवं तापी नदियां भ्रंश घाटी में प्रवाहित होती हैं।
नर्मदा भ्रंश घाटी सतपुड़ा पहाड़ी के उत्तर में तथा
तापी भ्रंश घाटी सतपुड़ा पहाड़ी के दक्षिण में है।
– नर्मदा एवं तापी नदियां प्रायद्वीपीय पठार के सामान्य ढाल के विपरीत अपने भ्रंश घाटी में पश्चिम दिशा में प्रवाहित होते हुए अपना जल खंभात की खाड़ी में गिराता है।

कारण ?

क्योंकि नर्मदा एवं तापी भ्रंश घाटी यों का ढाल पश्चिम की ओर है जबकि प्रायद्वीपीय पठार का ढाल पूर्व की ओर है।
– पश्चिमी घाट से निकलकर अरब सागर में गिरने वाली नदियां बहुत ही छोटी है क्योंकि पश्चिमी घाट का पश्चिमी ढाल कागारनुमा होने के कारण, पश्चिमी घाट से निकलने वाली नदियां बहुत ही तीव्र ढलानों से बहती हैं जिसके कारण यह नदियां प्रपाती हैं अर्थात ये नदियां झरनों या जल प्रपातों का निर्माण करती हैं पर यह नदियां डेल्टा का निर्माण नहीं कर पाती हैं।

लूनी नदी

– लूनी नदी उत्तरी राजस्थान में अरावली पहाड़ी से निकलती है तथा सांभर झील से गुजरती है तथा गुजरात में कच्छ के रण या दलदल में विलीन हो जाती है।
– लूनी नदी समुद्र तट तक नहीं पहुंच पाती है।
– अजमेर लूनी नदी के तट पर है।

साबरमती नदी

– साबरमती नदी राजस्थान में उदयपुर जिले में मेवाड़ से निकलती हुई खंभात की खाड़ी में अपना जल गिराती है।
– गुजरात की राजधानी गांधीनगर तथा अहमदाबाद साबरमती नदी के तट पर स्थित है।

माही नदी

– माही नदी मध्य प्रदेश में विंध्य पर्वत से निकलकर खंभात की खाड़ी में गिरती है।
– माही नदी मध्य प्रदेश गुजरात एवम राजस्थान से होकर प्रवाहित होती है।
– माही नदी राजस्थान में कर्क रेखा को दो बार काटती है।

नर्मदा नदी

– अरब सागर में जल गिराने वाली प्रायद्वीपीय भारत की नदियों में सबसे लंबी नदी नर्मदा नदी है।
– नर्मदा नदी गोदावरी और कृष्णा नदी के बाद प्रायद्वीपीय भारत की तीसरी सबसे लंबी नदी है।
– नर्मदा नदी मैकाल पहाड़ी पर स्थित अमरकंटक चोटी से निकलकर पश्चिम में अपने भ्रंश घाटी में प्रवाहित होते हुए भरूच या भडौच के पास अपना मुहाना बनाती है।
– मध्य प्रदेश का जबलपुर शहर और गुजरात का भडौच नर्मदा नदी के तट पर स्थित है।
– नर्मदा नदी तीन राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात से होकर प्रवाहित होती है।
– नर्मदा नदी की सर्वाधिक लं० मध्य प्रदेश में है।
– नर्मदा नदी जबलपुर के पास भेड़ाघाट की संगमरमर की चट्टानों में एक बहुत ही सुंदर जलप्रपात धुआंधार जलप्रपात बनाती है। या कपिलधारा जलप्रपात

तापी नदी

– तापी नदी मध्य प्रदेश में महादेव पहाड़ी से लगे हुए बैतूल पठार से निकलती है और सतपुड़ा पहाड़ी के दक्षिण में अपनी भ्रंश घाटी में प्रवाहित होते हुए सूरत के समीप खंभात की खाड़ी में अपना जल गिराती है।
– सूरत तापी नदी के तट पर है जबकि भडौच नर्मदा नदी के मुहाने पर है।
– नर्मदा भ्रंश घाटी सतपुड़ा पहाड़ी के उत्तर में तथा तापी भ्रंश घाटी सतपुड़ा पहाड़ी के दक्षिण में है अर्थात सतपुड़ा पहाड़ी नर्मदा एवं तापी भ्रंश घाटी के बीच में स्थित एक ब्लॉक पर्वत या भ्रंशोत्थ पर्वत पर हैं।
– तापी नदी अरब सागर में जल गिराने वाली प्रायद्वीपीय भारत की दूसरी सबसे लंबी नदी है।
– तापी नदी तीन राज्य मध्य प्रदेश महाराष्ट्र गुजरात से प्रवाहित होती है।
– गुजरात में उकाई और काकराकार जल विद्युत परियोजनाएं तापी नदी पर स्थित है।

सह्याद्री या पश्चिमी घाट से निकलकर अरब सागर में गिरने वाली नदियां

– पश्चिमी घाट से निकलकर अरब सागर में गिरने वाली नदियां बहुत छोटी होती हैं।
– पश्चिमी घाट का पश्चिमी ढाल कागारनुमा होने के कारण ये नदियां बहुत तीव्र ढाल से प्रवाहित होती हैं तथा अपने मुहाने पर डेल्टा का निर्माण नहीं करती हैं बल्कि झरना या जलप्रपात का निर्माण करती हैं।

– पश्चिमी घाट से निकलकर अरब सागर में जल गिराने वाली नदियों के दो स्त्रोत हैं –

1- जून से सितंबर तक – दक्षिणी पश्चिमी मानसून
2- प्रायद्वीपीय पठार के दरारों में संचित जल शुष्क मौसम में पश्चिमी घाट की नदियों को मिलता रहता है यही कारण है कि नदियों में जल की मात्रा बनी रहती है।

1- गुजरात – शतरंजी नदी, मादर नदी
2-  गोवा – मांडवी नदी, जुआरी नदी
– गोवा की राजधानी पणजी मांडवी नदी के तट पर है।
3- कर्नाटक में – शरावती नदी, गंगावैली नदी
4- केरला में – भरतपुरवा नदी, पेरियार नदी, पाम्बा नदी

– भरतपुरवा केरला की सबसे लंबी नदी है।
– पेरियार केरला की दूसरी सबसे लंबी नदी है।

– कर्नाटक में शरावती नदी पर जोग जलप्रपात है।
– जोग जलप्रपात को गरसोप्पा जलप्रपात या महात्मा गांधी जलप्रपात भी कहते हैं।

– जोग जलप्रपात की ऊंचाई – 271 मीटर

Note- भारत का सबसे ऊंचा सीधा गिरने वाला झरना जोग जलप्रपात है लेकिन भारत का सबसे ऊंचाई पर स्थित जलप्रपात कुंचिकल जलप्रपात है।

– सहयाद्रि से निकलकर अरब सागर में जल गिराने वाली नदियां चुकी अत्यधिक प्रपाती है इसलिए यहां जल विद्युत उत्पादन की संभावना बहुत अधिक है।
यही कारण है पश्चिमी घाट के क्षेत्रों में अनेक जल विद्युत संयंत्रों का विकास हुआ है।

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