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अरब सागर शाखा (अध्याय -25 भारत का भूगोल )

दक्षिणी पश्चिमी मानसून की अरब सागर शाखा

– दक्षिणी पश्चिमी मानसून से गुजरात से लेकर कन्याकुमारी तक पूरे पश्चिमी तटीय मैदान पर वर्षा होती है। (अरब सागर शाखा द्वारा)

– 1 जून को केरल के मालाबार तट पर वर्षा को मानसून प्रस्फुट या मानसून धमाका कहते हैं।

– भारत में वर्षा का वितरण पहाड़ियों द्वारा निर्धारित होता है जब आर्द हवा पहाड़ियों से टकराती है तो ऊपर उठने का कोशिश करती हैं या ऊपर उठती हैं हवा जैसे जैसे ऊपर उठती है हवा के तापमान में कमी आती है जिसके कारण हवा अपनी नमी को पहाड़ के ढाल पर छोड़ देती है|

इस प्रक्रिया को एडियाबेटिक ताप ह्रास कहते हैं। तथा इसी कारण वर्षा होती है इसे पर्वतीय वर्षा कहते हैं।

{ 1june to 15 sep}

– पश्चिमी तटीय मैदान में दक्षिण से उत्तर की ओर वर्षा कम होती है क्योंकि दक्षिण की पहाड़ियां अत्यधिक ऊंची है जिसके कारण हवा ज्यादा ऊपर उठती है तथा ज्यादा नमी छोड़ती है।

– अरब सागर शाखा पश्चिमी तटीय मैदान में प्रवेश करने के पश्चात नर्मदा एवं तापी के भ्रंश घाटी में प्रवेश करती है तथा पूर्व की ओर बढ़ती हुई ये हवाएं अमरकंटक पठार की पहाड़ियों तक वर्षा करने में सक्षम होती हैं।

– अरब सागर शाखा उत्तर में प्रवाहित होते हुए गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में गिर और गांडव पहाड़ियों से टकराती हैं तथा सौराष्ट्र क्षेत्र में वर्षा करती हैं।

यही कारण है कि अधिकतर गुजरात सूखा होने के बावजूद गीर तथा गांडव की पहाड़ियां हरे भरे जंगलों से ढकी हुई हैं।

– इसके बाद अरब सागर शाखा उत्तर की ओर प्रवाहित होते हुए अरावली के गुरु शिखर चोटी से टकरा जाती है जिसके कारण माउंट आबू में वर्षा होती है परंतु अरावली श्रेणी के समानांतर अरब सागर शाखा के प्रवाह के कारण यह अरावली श्रेणी से टकरा नहीं पाती है जिसके कारण राजस्थान में वर्षा नहीं होती है।

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