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बंगाल की खाड़ी शाखा(अध्याय -26 भारत का भूगोल )

– द० प० मानसून की दिशा द० प० से उ० पू० की ओर हैं।

– बंगाल की खाड़ी शाखा उ० पू० में प्रवाहित होने के कारण पूर्वी घाट से नहीं टकराती है तथा इसके समानांतर आगे बढ़ती है जिसके कारण पूर्वी तटीय मैदान पर यह वर्षा नहीं करा पाती।

– बंगाल की खाड़ी शाखा पूर्वी घाट के समानांतर उत्तर की ओर आगे बढ़ते हुए सबसे पहले मेघालय के शिलांग पठार से टकराती हैं तथा इस पठार पर या गारो, खासी, जयंतिया, पहाड़ी पर वर्षा होती है।

सबसे अधिक वर्षा

– खांसी पहाड़ी पर स्थित चेरापूंजी तथा मासिनराम में 1080 cm लगभग वर्षा होती है।

– मासिनराम विश्व में सर्वाधिक वर्षा प्राप्त करने वाला स्थान है।

– बंगाल की खाड़ी शाखा शिलांग पठार से टकराने के बाद असम की सुरमा घाटी ( मेघालय के दक्षिण में असम का भाग) के रास्ते असम में प्रवेश करती है तथा ब्रम्हपुत्र घाटी में प्रवेश करती है।

ब्रम्हपुत्र घाटी तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरी हुई है इसके उत्तर एवं पूर्व में हिमालय तथा दक्षिण में शिलांग पठार है जिसके कारण यह हवाएं पहाड़ी से टकराती हुई ऊपर उठती हैं तथा नमी छोड़ देती है जिसके कारण ब्रम्हपुत्र की घाटी में पर्याप्त वर्षा होती है।

– बंगाल की खाड़ी शाखा शिलांग पठार से टकराने के बाद उत्तर भारत में हुगली नदी के मुहाने से प्रवेश करती है तथा पश्चिम बंगाल होते हुए उत्तर भारत के मैदान में प्रवेश करती है और कोलकाता, पटना, इलाहाबाद, कानपुर होते हुए दिल्ली तक पहुंचती है।

– उत्तर भारत के मैदान में बंगाल की खाड़ी शाखा द्वारा प्राप्त होने वाला वर्षा पूर्व से पश्चिम की तरफ अर्थात कोलकाता से दिल्ली की तरफ घटती चली जाती है। क्योंकि पूर्व से पश्चिम की तरफ जाने में हवाओं की नमी कमी होती चली जाती है।

– दिल्ली अंतिम स्थान है जहां बंगाल की खाड़ी शाखा द्वारा वर्षा होती है।

– बंगाल की खाड़ी शाखा राजस्थान के अरावली श्रेणी से टकराती है परंतु राजस्थान में वर्षा नहीं होती है।

कारण

1- क्योंकि यहां पहुंचने के समय बंगाल की खाड़ी शाखा में नमी बहुत कम हो जाती है।

2- राजस्थान itcz का क्षेत्र है अतः इसकी भूमि बहुत अधिक गर्म है अतः बंगाल की खाड़ी शाखा तथा दक्षिण पश्चिम मानसून जब राजस्थान पहुंचती है तब हवाएं गर्म हो जाती हैं तथा हवाओं की सापेक्षिक आर्द्रता घट जाती है जिसके कारण राजस्थान में वर्षा नहीं हो पाती है।

इस प्रकार राजस्थान में दक्षिण पश्चिम मानसून (अरब सागर शाखा) तथा बंगाल की खाड़ी शाखा द्वारा वर्षा नहीं हो पाती है अतः राजस्थान एक सूखाग्रस्त राज्य है।

 राजस्थान में सिंचाई के लिए इंदिरा गांधी नहर निकाला गया है।

सतना जीवन व्यास नदी के मिलन स्थान हरिकेबैराज से निकलती है।

– फेरल के नियम के अनुसार उत्तरी गोलार्ध में हवाएं अपने दाएं तरफ मुड़ने का प्रयास करती हैं तथा बंगाल की खाड़ी शाखा जब उत्तर भारत के मैदान में प्रवेश करती है तो यह अपने दाएं तरफ शिवालिक श्रेणी की ओर बढ़ने का प्रयास करती हैं तथा यही कारण है कि शिवालिक श्रेणी के दक्षिणी ढालो पर वर्षा होती है।

– इन हवाओं के दाएं तरफ मुड़ने के कारण ही प्रायद्वीपीय भारत के पठार के उतरी ढाल पर वर्षा नहीं हो पाती है यही कारण है कि उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश में फैला बुंदेलखंड का क्षेत्र एक सूखाग्रस्त क्षेत्र है तथा सूखा ग्रस्त होने के कारण या पिछड़ा क्षेत्र है।

– बंगाल की खाड़ी शाखा द्वारा उत्तर भारत के शिवालिक श्रेणी के दक्षिणी ढालों पर सर्वाधिक वर्षा होती है।

– बंगाल की खाड़ी शाखा पूर्वी तटीय मैदान पर वर्षा नहीं करा पाती है पूर्वी तटीय मैदान में वर्षा बंगाल की खाड़ी में उत्पन्न होने वाले उष्ण चक्रवात से होती है।

Ex- हुदहुद

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