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भारत की मिट्टियाँ- भाग 3 (अध्याय -35 भारत का भूगोल )

पीट एवं दलदली मृदा

– केरल एवं तमिलनाडु के तट पर अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जलजमाव के कारण गीली मिट्टी का निर्माण हुआ है इस गीली मिट्टी को पीट मिट्टी कहते हैं।

– पीट मिट्टी का निर्माण गीली भूमि पर वनस्पतियों के सड़ने से होता है। अतः इसी कारण पीट मिट्टी में अपेक्षाकृत ह्यूमस की मात्रा अधिक पाई जाती है।

– भारत में दलदली मिट्टी सुंदरवन के तट तथा उड़ीसा के तट पर पाया जाता है। भारत में दलदली मिट्टी ऐसे तटीय क्षेत्रों में पाई जाती है जहां समुद्र का ज्वारीय जल प्रवेश करता है।

– भारत में सर्वाधिक ह्यूमस दलदली मिट्टी में पाई जाती है।

लवणीय एवं क्षारीय मृदा

– लवणीय एवं क्षारीय मृदा का निर्माण अधिक सिंचाई वाले क्षेत्रों में हुआ है।

– हरित क्रांति के अंतर्गत भारत के पंजाब, हरियाणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश, और उत्तरी राजस्थान में नहरी सिंचाई के कारण लवणीय एवं क्षारीय मृदा का निर्माण हुआ है।

– लवणीय एवं क्षारीय मृदा को रेह एवं कल्लर के नाम से जाना जाता है।

– ऐसे मृदा में लवण प्रतिरोधी फसल ही उगाए जा सकते हैं। जैसे – बरसीम, धान, गन्ना

– अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विश्व भर की मिट्टियों को 11 भागों में बांटा गया है।

इन 11 वर्गों में भारत की भी कुछ मिट्टियां शामिल है।

1- इनसेफ्टीसॉल – इसके अंतर्गत गंगा एवं ब्रह्मपुत्र घाटी की मिट्टी को शामिल किया जाता है।

– जलोढ़ मिट्टी

2- वर्टिसॉल –  इसके अंतर्गत दक्कन पठार की काली मिट्टी को शामिल किया जाता है।

3- एरिडिसॉल – इसके अंतर्गत राजस्थान के मरुस्थलीय मिट्टी को शामिल किया जाता है।

4- हिस्टोसॉल – इसके अंतर्गत पीट एवं दलदली मिट्टी को शामिल किया जाता है (केरला एवं तमिलनाडु की)

5 – ऑक्सीसॉल – ऑक्सीसॉल के अंतर्गत केरल की लैटेराइट मिट्टी को रखा गया है।

– केंद्रीय मृदा संरक्षण बोर्ड का गठन 1953 में हुआ था।

– क्षेत्रफल की दृष्टि से सर्वाधिक बंजर भूमि राजस्थान में पाई जाती है।

– सर्वाधिक सूखाग्रस्त क्षेत्र राजस्थान राज्य में है।

– प्रतिशत की दृष्टि से कुल क्षेत्रफल का सर्वाधिक बंजर भूमि जम्मू-कश्मीर में है।

– सर्वाधिक लवणीय मृदा क्षेत्र गुजरात राज्य में है क्योंकि कच्छ जिला गुजरात का दलदली क्षेत्र है।

– सर्वाधिक क्षारीय मृदा क्षेत्र उत्तर प्रदेश में है क्योंकि उत्तर प्रदेश का एक बड़ा भाग नहरी सिंचाई के अधीन है।

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