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भारतीय जलवायु | भाग 1 (अध्याय -21 भारत का भूगोल )

जलवायु

– मौसम वायुमंडल में दिन-प्रतिदिन होने वाला परिवर्तन है।

तापमान, वर्षा, सूर्य का विकिरण

– किसी स्थान पर अनेक वर्षों में मापी गई मौसम की औसत दशा को जलवायु कहते हैं। (लगभग 30 वर्ष)

– भारत की स्थिति उष्णकटिबंध में होने के कारण अधिकतर वर्षा मानसूनी पवन से होती है। इसलिए भारत की जलवायु को मोटे तौर पर मानसूनी जलवायु कहा जाता है तथा मानसून शब्द अरबी भाषा के मौसिम से लिया गया है।

– किसी स्थान की जलवायु उसके स्थिति ऊंचाई समुद्र से दूरी तथा उच्चावच पर निर्भर करती है।

– जलवायु ताप और आर्द्रता नमी पर निर्भर करता है।

भारत की जलवायु – उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु

– कर्क रेखा भारत के बीचो बीच लगभग गुजरती है अर्थात कर्क रेखा से दक्षिण की ओर का भारतीय भाग उष्ण कटीबंध तथा कर्क रेखा से उत्तर की ओर का भारतीय भाग शीतोष्ण कटिबंध में आता है। इसके बावजूद भी भारत को उष्ण कटिबंधीय प्रदेश कहते हैं।

कारण ?

भारत के उत्तर में स्थित हिमालय के कारण साइबेरिया (रूस का पूर्वी भाग) तथा चीन में चलने वाली ध्रुवीय हवा (अत्यधिक ठंडा हवा) भारत में प्रवेश नहीं कर पाती है। जिस कारण भारत में वास्तविक शीत ऋतु नहीं पाया जाता अर्थात हिमालय जलवायु विभाजन का कार्य करता है अर्थात हिमालय के उत्तरी भाग में शीतोष्ण जलवायु तथा दक्षिणी भाग उष्ण कटिबंधीय जलवायु पाया जाता है।

– भारत में कर्क रेखा जलवायु विभाजन का कार्य नहीं कर पाता।

– उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में वर्ष भर वर्षा होती है क्योंकि उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र होने के कारण यहाँ सागरीय जल अत्यधिक गर्म हो जाता हैं, तथा जब गर्म हवा ऊपर उठती है जिसके कारण यहां हमेशा वर्षा होती है। लेकिन हिमालय की उपस्थिति के कारण हिंद महासागर से आने वाली आर्द्रता (नमी) वाली हवा अवरोधित होती है जिसके कारण पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में वर्षा होती है।

– हिमालय की उपस्थिति के कारण ही भारत के शीतोष्ण कटिबंधीय प्रदेश में वर्षा होती है।

भारत एक मानसूनी जलवायु वाला देश कैसे हैं?

मानसून अरबी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है – मौसम

– मानसून का अर्थ है मौसम (ऋतु) परिवर्तन के साथ हवा की दिशा में भी विपरीत परिवर्तन।

 भारत में 2 तरह की मानसून हवा पाई जाती है।

1- उत्तर-पूर्वी मानसून – winter

2- दक्षिणी पश्चिमी मानसून – summer

–  जो हवाएं शीत ऋतु में भारत में उत्तर पूर्व दिशा से बहकर आती हैं उसे उ० पू० मानसून कहते हैं। उ० पू० मानसून के स्थलखंड से प्रवाहित होने के कारण इसमें नमी की मात्रा नहीं होती है जिसके कारण वर्षा ना के बराबर होती है।

अपवाद

लेकिन जब यह उत्तर पूर्वी मानसून पूर्वोत्तर भारत से बंगाल की खाड़ी होकर गुजरता है तो यह सागर से पर्याप्त मात्रा में नमी ग्रहण कर लेता है तथा तमिलनाडु के पूर्वी घाट से टकराती है जिसके कारण ठंड के मौसम में तमिलनाडु के कोरोमंडल तट पर वर्षा होती है।

– दक्षिण पश्चिम मानसून भारत में गर्मी के मौसम में अरब सागर से द० प० दिशा से होकर आता है। भारत में 90% वर्षा द० प० मानसून से होता है।

भारत में वर्षा

भारत में 2 ऋतु में वर्षा होती है।

1- ग्रीष्म ऋतु में

2- शीत ऋतु में

1- ग्रीष्म ऋतु में – 1 june to15 sept

दक्षिण पश्चिम मानसून के कारण

दक्षिण पश्चिम मानसून हिंद महासागर से होकर आने वाली अत्यधिक आर्द्रता युक्त हवाएं

दक्षिण पश्चिम मानसून सबसे पहले 1 जून को पश्चिमी घाट से टकराकर केरल के मालाबार तट पर वर्षा कराती है। तथा 22 जुलाई तक पूरे भारत में फैल जाता है।

– दक्षिण पश्चिम मानसून कोरोमंडल तट, आंध्र तट तथा उड़ीसा तट पर वर्षा नहीं करा पाता।

2- शीत ऋतु में- 20 dec to march

भारत में शीत ऋतु में होने वाली वर्षा दो तरह कि हवाओं से होती हैं।

1- प० विक्षोभ

2- उ० पु० मानसून

प० विक्षोभ

– पश्चिमी विक्षोभ एक शीतोष्ण चक्रवात है जिसकी उत्पत्ति भारत के पश्चिम में यूरोप में भूमध्य सागर के ऊपर होता है तथा यह कैस्पियन सागर से भी होकर गुजरती है जिसके कारण इसमें पर्याप्त नमी आ जाती है।

प० विक्षोभ मुख्य रूप से पश्चिमोत्तर भारत में वर्षा कराती है। पश्चिम विक्षोभ द्वारा होने वाला वर्षा पहाड़ी राज्यों में जम्मू कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में हिमपात के रूप में होता है तथा पंजाब, हरियाणा व दिल्ली में जल बूंदों के रूप में वर्षा होती है।

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