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भारतीय जलवायु | भाग 2 (अध्याय -22 भारत का भूगोल )

पश्चिमी विक्षोभ

– पश्चिमी विक्षोभ एक शीतोष्ण चक्रवात है जिसकी उत्पत्ति भारत के पश्चिम में यूरोप में भूमध्य सागर के ऊपर होता है तथा यह कैस्पियन सागर से भी होकर गुजरती है जिसके कारण इसमें पर्याप्त नमी आ जाती है।

प० विक्षोभ मुख्य रूप से पश्चिमोत्तर भारत में वर्षा कराती है। पश्चिम विक्षोभ द्वारा होने वाला वर्षा पहाड़ी राज्यों में जम्मू कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में हिमपात के रूप में होता है तथा पंजाब, हरियाणा व दिल्ली में जल बूंदों के रूप में वर्षा होती है।

आमतौर पर हिमालय के उत्तर में मध्य एशिया तिब्बत और चीन में धरातल से 6 से 12 किलोमीटर की ऊंचाई पर छोभ मंडल सीमा के पास पश्चिम से पूर्व दिशा में चलने वाली शक्तिशाली वायु धाराओं को जेट धारा कहते हैं।इसको पछुआ जेट धारा भी कहते हैं।

– जब शीत ऋतु में सूर्य दक्षिणायन होता है, (तो सूर्य मकर रेखा पर चमकने लगता है) तो जेट धारा भी दक्षिण की ओर खिसक आती है तथा हिमालय जेट धारा के मार्ग में आ जाता है जिसके कारण जेट धारा दो मार्गों में बैठ जाती है।

1- पछुआ जेट धारा की उत्तरी शाखा

2- पछुआ जेट धारा की दक्षिणी शाखा

– पछुआ जेट धारा की दक्षिणी शाखा उत्तर भारत के विशाल मैदान पर पश्चिम से पूर्व की ओर प्रवाहित होने लगती है तथा शीत ऋतु में उत्तर भारत को बहुत प्रभावित करती है।

– पछुआ जेट धारा की दक्षिणी शाखा प० विछोभ को अपने साथ बहाकर भारत लाती है।

– पश्चिमी विक्षोभ द्वारा होने वाला वर्षा हिमालय राज्यों में सेब के लिए तथा उत्तर भारत में रबी फसल के लिए बहुत उपयोगी होता है।

हिमरेखा:

वायुमंडल की वह सीमा जिसके ऊपर तापमान जीरो डिग्री सेल्सियस से कम हो।

– धरातल से लगभग 4400m के बाद तापमान औसत 0℃ से कम हो जाता है।

– प० विक्षोभ से शीत ऋतु में उत्तर भारत के पहाड़ी तथा मैदानी भागों में वर्षा होती है।

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2 thoughts on “भारतीय जलवायु | भाग 2 (अध्याय -22 भारत का भूगोल )

  1. Sir, आप व्हाट्सप ग्रुप बनाओ,,मेरेख्याल से ग्रुप में cmnt से ज्यादा रेस्पॉन्स मिलेगा,,,,ऑनलाइन भी जानकारी या नोट्स या प्रश्न उत्तर भी बढ़िया चलेगा,,थैंक्स

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