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दक्षिण भारत की नदियां (अध्याय -17 भारत का भूगोल )

प्रायद्वीपीय भारत की नदियां या दक्षिण भारत की नदियां

प्रायद्वीपीय भारत की नदियां एवं हिमालय की नदियों में अंतर

– प्रायद्वीपीय भारत की नदियां बहुत पुरानी है जबकि हिमालय की नदियां नयी है। हिमालय की नदियां अपनी युवावस्था में हैं अर्थात हिमालय की नदियां अभी भी अपने घाटी को लगातार गहरा कर रही हैं, जबकि प्रायद्वीपीय भारत की नदियां अपने प्रौढ़ावस्था में है। अर्थात प्रायद्वीपीय भारत की नदियां अपने घाटी को गहरा करने का कार्य लगभग समाप्त कर चुकी हैं और आधार तल को प्राप्त कर चुकी हैं।
 किसी भी नदी का आधार तल समुद्र तल होता है।
– हिमालय की नदियां उत्तर भारत के मैदान में विसर्पण करती हुई चलती हैं तथा कभी-कभी अपना रास्ता भी बदल देती हैं, (कोसी) जबकि प्रायद्वीपीय भारत की नदियां कठोर पठारी संरचना द्वारा नियंत्रित होने के कारण विसर्पण नहीं कर पाती।
– प्रायद्वीपीय भारत की नदियां अपने उद्गम से लेकर मुहाने तक एक निश्चित मार्ग में कठोर चट्टानों पर प्रवाहित होती हैं।

– हिमालय की नदियां प्रायद्वीपीय भारत की नदियों से अपेक्षाकृत बहुत लंबी होती हैं क्योंकि इन का उद्गम स्थल मुहाना से बहुत दूर होता है हिमालय से निकलने वाली भारत की सबसे लंबी नदी गंगा की लंबाई 2525 किलोमीटर है जबकि दक्षिण भारत की सबसे लंबी नदी गोदावरी की लंबाई 1465 किलोमीटर ही है।

हिमालय से निकलने वाली नदियां वर्ष वाहिनी है अर्थात हिमालय की नदियों में वर्ष भर जल प्रवाह समुचित रुप से बना रहता है क्योंकि हिमालय की नदियों के जल के दो स्त्रोत हैं।

ग्लेशियर
वर्षा जल

हिमालय की अधिकांश चोटियां 6000 मीटर से भी ऊपर है जबकि क्षोभामंडल में हिमरेखा की उचाई 4400 मीटर होती है अर्थात हिमालय की जो भी छोटी हिंदी रेखा से ऊपर उठी है हमेशा हिमाच्छादित रहती है। वास्तव में हिमालय की चोटियों पर पाया जाने वाला ग्लेशियर ही हिमालय की नदियों का मुख्य स्त्रोत है।
जबकि प्रायद्वीपीय नदियां वर्षा वाहिनी ना होकर मौसमी है अर्थात इन को केवल वर्षा जल पर निर्भर रहना पड़ता है। हिमरेखा की औसत ऊंचाई 4400 मीटर है जबकि प्रायद्वीपीय पठार की औसत ऊंचाई 800 मीटर है।

प्रायद्वीपीय भारत की नदियां या दक्षिण भारत की नदियों को दो भागों में बांट सकते हैं –

1- अरब सागर में जल गिराने वाली नदियां
2-  बंगाल की खाड़ी में जल गिराने वाली नदियां

बंगाल की खाड़ी में जल गिराने वाली नदियां

– बंगाल की खाड़ी में या पूर्वी तट पर जल गिराने वाली दक्षिण भारत की नदियों का उत्तर से दक्षिण की ओर क्रम इस प्रकार है।
– दामोदर
– स्वर्णरेखा
– वैतरणी

– ब्राम्हणी
–  महानदी
– गोदावरी

– कृष्णा
– पेन्नार
– कावेरी

– वैगाई
– ताम्रपर्णी

दामोदर नदी

– दामोदर नदी छोटा नागपुर पठार के बीचो-बीच भ्रंश घाटी में पूर्व की ओर प्रवाहित होते हुए हुगली नदी में मिल जाती है अर्थात दामोदर नदी प्रत्यक्ष रुप से बंगाल की खाड़ी में ना गिरकर हुगली नदी के माध्यम से अपना जल बंगाल की खाड़ी में गिराती है।

स्वर्णरेखा नदी

– स्वर्णरेखा नदी झारखंड की राजधानी रांची के पास से निकलती है और 3 राज्यों से होकर प्रवाहित होती है – और उड़ीसा तट पर अपना मुहाना बनाती है।
– छोटा नागपुर पठार एक औद्योगिक क्षेत्र है और तमाम औद्योगिक इकाइयों से निकला रासायनिक अपशिष्ट स्वर्णरेखा नदी में गिराया जाता है जिस कारण स्वर्णरेखा नदी प्रदूषित हो चुकी है जिसके कारण इस नदी में जलीय जीव नहीं है।
– जमशेदपुर स्वर्णरेखा नदी के तट पर है। इसी कारण स्वर्णरेखा नदी को जैविक मरुस्थल कहा जाता है

 वैतरणी नदी

– वैतरणी नदी उड़ीसा के क्योमझर पठार से निकलकर उड़ीसा के तट पर गिरती है।

ब्राम्हणी नदी

– ब्राम्हणी नदी भी रांची के समीप से निकलती है तथा उड़ीसा के तट पर मुहाना बनाती है।
Note-  तीन नदियां छोटा नागपुर पठार से निकलती हैं
– दामोदर, स्वर्णरेखा, ब्राम्हणी

महानदी

– महानदी छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य पठार से निकलती है और उड़ीसा में कटक के पास अपना डेल्टा बनाती है।
– छत्तीसगढ़ में महानदी की घाटी को छत्तीसगढ़ बेसिन कहते हैं।

छत्तीसगढ़ बेसिन धान उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है इसलिए छत्तीसगढ़ बेसिन को “धान का कटोरा” कहते हैं।

गोदावरी नदी

– गोदावरी नदी दक्षिण भारत की सबसे लंबी नदी है। लंबाई 14 से 65 किलोमीटर

– गोदावरी नदी को बूढ़ी गंगा भी कहते हैं।
– गोदावरी नदी महाराष्ट्र में पश्चिमी घाट पहाड़ी पर स्थित नासिक के त्र्यंबक नामक स्थान से निकल महाराष्ट्र, तेलंगना, एवं आंध्रप्रदेश में प्रवाहित होते हुए राजमुंद्री के पास डेल्टा बनाती है।

– गोदावरी की सहायक नदियां इस प्रकार हैं-

प्रवरा, पूर्णा, वेनगंगा, पेनगंगा, प्राणहिता, इंद्रावती, मंजीरा-  दक्षिण की ओर से गोदावरी नदी में मिलती है।
– वेनगंगा गोदावरी की सबसे लंबी सहायक नदी है।
– इंद्रावती नदी उड़ीसा से निकलकर छत्तीसगढ़ में बस्तर के पठार होकर बहते हुए तेलंगाना में गोदावरी से मिल जाती है।
– इंद्रावती नदी गोदावरी में मिलने वाली सबसे पूर्वी नदी है।
– बस्तर के पठार पर बहने वाली मुख्य नदी – इन्द्रावती नदी|

कृष्णा नदी

– दक्षिण भारत की दूसरी सबसे लंबी नदी

– कृष्णा नदी महाराष्ट्र में पश्चिमी घाट पर्वत पर महाबलेश्वर घाटी से निकलकर चार राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश होते हुए प्रवाहित होती है और विजयवाड़ा के समीप अपना डेल्टा बनाती है।
– आंध्र प्रदेश के तट पर कृष्णा और गोदावरी नदियों के डेल्टा के बीच में कोलेरू झील है।

– कृष्णा की सहायक नदियां

– तुंगभद्रा, घाटप्रभा, मालप्रभा, दूधगंगा, पंचगंगा, भीमा, कोयना, मूसी
– तुंगभद्रा नदी पश्चिमी घाट पर्वत से दो धाराओं में निकलती है – तूंगा एवं भद्रा। तुंगभद्रा कृष्णा की सबसे लंबी सहायक नदी है दक्षिण ओर से कृष्णा नदी में मिलती है।
– हैदराबाद मूसी नदी के तट पर है।

पेन्नार नदी

– पेन्नार नदी कृष्णा और कावेरी नदी के बीच है।
– पेन्नार नदी कर्नाटक के कोलार नामक स्थान से निकलती है और आंध्र प्रदेश में अपना मुहाना बनाती है।

कावेरी नदी

– कावेरी नदी कर्नाटक में पश्चिमी घाट पर्वत पर ब्रम्हगिरी या पुष्पगिरी पहाड़ी से निकलकर कर्नाटक एवं तमिलनाडु में प्रवाहित होती है।

– कावेरी नदी को दक्षिण भारत की गंगा दक्षिण गंगा कहते हैं।

– कावेरी नदी की घाटी धान की खेती के लिए प्रसिद्ध है जिसके कारण इसे दक्षिण भारत का धान का कटोरा कहते हैं।
– हालांकि कावेरी नदी केवल दो राज्यों कर्नाटक केरल तमिलनाडु में प्रवाहित होती है परंतु इसका जलग्रहण क्षेत्र 4 राज्यों में है – कर्नाटक, तमिलनाडु, केरला, आंध्र प्रदेश
इन चारों राज्यों में कावेरी नदी जल विवाद रहा है।
– कावेरी की सहायक नदी – शीमसा, अकार्वती हेमवती, अमरावती, काबिनी, भवानी, लक्ष्मणतीर्थ, लोकपावनि
– जहां दक्षिण भारत की अधिकांश नदियों का स्त्रोत केवल वर्षा जल है अर्थात मानसून है वही कावेरी नदी दक्षिण भारत की एकमात्र नदी है जिस में जल की मात्रा वर्षभर बनी रहती है अर्थात कावेरी नदी वर्ष वाहिनी है।
कारण
क्योंकि कावेरी नदी के जल के दो स्रोत हैं।
1- ऊपरी जल ग्रहण क्षेत्र में दक्षिणी पश्चिमी मानसून से
2- निचले जलग्रहण क्षेत्र में अर्थात कोरोमंडल तट पर उत्तर पूर्वी मानसून से

वैगाई नदी

– वैगाई नदी तमिलनाडु में वनुसनाग पहाड़ी से निकलकर पाक की खाड़ी में रामेश्वरम द्वीप के पास अपना मुहाना बनाती है।
– मदुरै शहर वैगाई नदी के तट पर है।

ताम्रपर्णी नदी

– ताम्रपर्णी नदी कार्डामम पहाड़ी या इलायची पहाड़ी पर स्थित अगस्तमलाई चोटी से निकलकर मन्नार की खाड़ी में अपना जल गिराती है।

 

 

Comments

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6 thoughts on “दक्षिण भारत की नदियां (अध्याय -17 भारत का भूगोल )

  1. सर नोट्स को किताब के अध्याय के साथ लिखिये । मेरे पास ओझा जी की बुक है और आपके अध्याय 15 से मिला है उससे पहले के नोट नहीं मिले। सर जी सभी के नोट्स भेज दे plz सर हो सके तो pdf में उपलोड करे धन्यवाद।

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