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जल विधुत उर्जा HYDROELECTRICITY INDIAN GEOGRAPHY (CH – 66)

जल विधुत उर्जा (HYDROELECTRICITY)
– जब जल के माध्यम से विधुत उत्पादन होता है अर्थात जब नदी जल या बांध के जल के सहारे टरबाइन नचाकर विधुत उत्पादन होता है तो उसे जल विधुत ऊर्जा कहते हैं।
– भारत की नदियों में अभिज्ञात जल विधुत क्षमता –  145000 mw
– जून 2017 तक देश में जल विधुत की स्थापित क्षमता 44600 mw हो गई है जो कि देश में विधुत की कुल स्थापित क्षमता का लगभग 14% है। (13.6%)
– जल विधुत ऊर्जा (HYDROELECTRICITY) का नवीकरणीय स्रोत होने के साथ-साथ पर्यावरण मित्र स्त्रोत भी है क्योंकि जल से विधुत उत्पादित करने से धुंआ का निष्कासन नहीं होता। इसलिए जल विधुत को ‘श्वेत कोयला’ भी कहा जाता है।

ऊर्जा को कई आधारों पर बांटा गया है।

1- नवीकरणीय – ऐसा संसाधन जो प्रकृति में हमेशा रहेगा – जल, वायु
2- अनवीकरणीय – ऐसा संसाधन जिसका भंडार प्रकृति में एक निश्चित समय के बाद समाप्त हो जाएगा।
Ex- कोयला, Ur, पेट्रोल, प्राकृतिक गैस
3- परंपरागत – ऐसा संसाधन जो समाप्त होने वाले हैं तथा जिन से प्रदूषण होता है तथा पर्यावरण को खतरा हो परंपरागत ऊर्जा कहलाते हैं ।
Ex- परमाणु विधुत, कोयला विधुत
4- गैर परंपरागत – ऐसा संसाधन जो समाप्त होने वाले नहीं हैं तथा पर्यावरण मित्र हैं अर्थात जिनसे प्रदूषण नहीं होता है गैर परंपरागत ऊर्जा कहलाते हैं।
Ex- जल विधुत, पवन विधुत, सौर ऊर्जा
– बड़ी जल विधुत परियोजनाओं को ऊर्जा के परंपरागत स्त्रोत के अंतर्गत रखते हैं क्योंकि इसके कारण पर्यावरण को नुकसान होता है जबकि 25 mw या इससे कम क्षमता वाले लघु जल विधुत परियोजनाओं को ऊर्जा के गैर परंपरागत स्त्रोत के अंतर्गत रखा जाता है क्योंकि ऐसी परियोजनाओं से पर्यावरण को नुकसान नहीं होता है।
– देश में सर्वाधिक जल शक्ति विभव या क्षमता (potential) ब्रह्मपुत्र बेसिन या नदी में मौजूद है क्योंकि इसके बाद प्रायद्वीपीय भारत की पूर्व की ओर बहने वाली नदियों में सर्वाधिक विभव मौजूद है।
– हालांकि देश में सर्वाधिक जल शक्ति विभव हिमालय की नदियों में मौजूद है लेकिन देश में सर्वाधिक जल शक्ति का विकास प्रायद्वीपीय भारत में हुआ है।

कारण –

1- क्योंकि हिमालय अत्यधिक ऊंचाई उबड़-खाबड़ विषम तथा वनाच्छादित होने के कारण दुर्गम है जिसके कारण यहां हाइड्रो पावर प्लांट कम लगाए गए हैं।
2- मुख्य कारण – उत्तर भारत के शहर हिमालय से दूर हैं।
– अर्थात विषम धरातल एवं उपभोग केंद्रों से दूरी के कारण हिमालय क्षेत्र में जल शक्ति का सीमित विकास हुआ है।
– देश में प्रथम जल विद्युत संयंत्र 1897 में दार्जिलिंग के सिद्रपोंग में स्थापित हुआ और सर्वप्रथम बिजली की सप्लाई भी यही हुई।
– इसके बाद 1902 में कर्नाटक के शिवसमुद्रम में कावेरी नदी पर दूसरे Hydro Power Plant की स्थापना की गई।
– देश में सर्वाधिक जल शक्ति की स्थापित क्षमता वाला राज्य – आंध्र प्रदेश
लेकिन सर्वाधिक जल विधुत उत्पादन वाला राज्य – हिमाचल प्रदेश
– देश की सबसे बड़ी जल विधुत परियोजना अरुणाचल प्रदेश में उपरी सियांग परियोजना है।

जलविद्युत परियोजना                राज्य

– रानीगट, तीस्ता                      सिक्किम
– सुबानसिरी, ऊपरी सियांग       अरुणाचल प्रदेश
– पार्वती चमेरा नाथापाझकारी     हिमाचल प्रदेश
– उड़ी, सलाल, बगलीहार,
दुलहस्ती, निम्बोबाजगो              J&k
– ओमकारेश्वर, तवा,
गांधी सागर, इंदिरा सागर            MP
– उकाई, सरदारसरोवर               गुजरात
– इडुक्की, शबरीगिरी                  केरल
– मैटूर, पेरियार                          तमिलनाडु
– कोयना                                   महाराष्ट्र
– श्रीशैलम, मचकुंड                    आंध्र प्रदेश
– लिंगनमक्की, शिवसमुद्रम          कर्नाटक
– पोंग, भाखड़ा                           पंजाब
– राणा प्रताप, जवाहर सागर         राजस्थान
– रिहंद, माताटीला, रामगंगा          U.P
– मैंथान तिलैया कोयलाकारो         झारखंड
– पंचेल हिल                              पश्चिम बंगाल
– उमियाम                                 असम

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