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गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोत RENEWABLE ENERGY INDIAN GEOGRAPHY (CH-69)

गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोत
– किसी भी देश का विकास ऊर्जा पर निर्भर होता है भविष्य में ऊर्जा संकट को ध्यान में रखकर आवश्यक है कि देश में विद्यमान गैर परंपरागत ऊर्जा स्त्रोतों की संभावनाओं को विकसित किया जाए।
– गैर परंपरागत ऊर्जा स्त्रोत के अंतर्गत सौर ऊर्जा पवन ऊर्जा, भूतापीय ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, समुद्री तरंग ऊर्जा, बायोमास एवं बायोगैस आदि को शामिल किया जाता है। इसे नवीकरणीय अथवा अक्षय ऊर्जा स्त्रोत भी कहते हैं जो कभी समाप्त नहीं होगी।
– देश में विद्यमान अक्षय ऊर्जा स्रोतों के विकास के लिए “गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोत विभाग” की स्थापना 1982 में की गई।
– देश में गैर परंपरागत ऊर्जा से संबंधित सभी मुद्दों की देखरेख के लिए एक पृथक मंत्रालय भी है जिसका नाम “गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोत मंत्रालय” है।
– वर्ष 2017 में देश में गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोत की कुल स्थापित क्षमता लगभग 57000 mw हो गई है जो कि देश के कुल विद्युत स्थापित क्षमता का 17% है।

हालांकि 2012 के आंकड़ों के अनुसार देश की कुल विद्युत स्थापित क्षमता में गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोत का योगदान 12% था।

सौर ऊर्जा

– हमारे देश में सौर ऊर्जा के विकास हेतु सर्वाधिक आदर्श दशाएं राजस्थान राज्य में है।
– सौर ऊर्जा का उपयोग दो रूपों में कर सकते हैं।

1- फोटोवोल्टाइक
2- सौर तापीय
– फोटोवोल्टाइक सेल अधिकाधिक क्षेत्र से सौर ऊर्जा को एकत्र कर सूर्य प्रकाश को सीधे विद्युत ऊर्जा में बदल देता है। इसे सौर सेल भी कहते हैं। कई सौर सेलों को जोड़कर सौर पैनल तैयार किया जाता है।
फोटोवोल्टाइक अर्थात सौर सेल वास्तव में सिलिकॉन का छोटा टुकड़ा होता है जिसे धूप में रखने पर विद्युत उत्पन्न करता है।
– पृथ्वी के क्रस्ट में पाए जाने वाले तत्व में ऑक्सीजन के बाद सिलिकन दूसरे स्थान पर है अतः यह प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
– O – Si – AL – Fe
– वर्ष 2010 में सौर ऊर्जा के विकास हेतु जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
– जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन के अंतर्गत 13वीं योजना के अंतर्गत (2022 तक) 20000 mw सौर विद्युत उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अनेक Solar Vallies का निर्माण किया जाएगा। सोलर वैली एक ऐसे औद्योगिक क्षेत्र होंगे जहां केवल Solar Energey का प्रयोग किया जाएगा।

पवन ऊर्जा

– पवन में गतिज ऊर्जा होती है।
– देश में गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोतों में विद्युत उत्पादन में सर्वाधिक 61% भाग पवन ऊर्जा का है।
– पवन ऊर्जा उत्पादन के मामले में भारत का USA, जर्मनी, स्पेन और चीन के बाद पांचवा स्थान है।
– शीर्ष पवन उत्पादक राज्य – तमिलनाडु
हमारे देश के तटीय राज्यों में पवन ऊर्जा के विकास की पर्याप्त संभावनाएं हैं क्योंकि यहां पवन निर्बाध रुप से प्रवाहित होती है। तटीय क्षेत्रों में पवन का वेग 10 Km/h होता है।
– कन्याकुमारी के समीप मुप्पनडल में सर्वाधिक Wind Perbine स्थापित किए गए हैं। यह एशिया का सबसे बड़ा पवन फार्म समूह है।

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