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लघु हिमालय और शिवालिक श्रेणी(अध्याय -7 भारत का भूगोल )

लघु हिमालय या मध्य हिमालय या हिमाचल हिमालय

– लघु हिमालय पूर्व से लेकर पश्चिम तक वृहद हिमालय के साथ-साथ विस्तृत है।

लघु हिमालय की पांच श्रेणियां उल्लेखनीय है।

1- परीपंजाल श्रेणी -( सबसे पश्चिमी श्रेणी जम्मू कश्मीर में)- परीपंजाल के उत्तर में श्रीनगर तथा दक्षिण में जम्मू है जम्मू से श्रीनगर जाने वाली सड़क बनिहाल दर्रे से होकर गुजरती है इस सड़क मार्ग को जम्मू कश्मीर सड़क मार्ग कहते हैं। परीपंजाल श्रेणी पर बनिहाल दर्रा है तथा जवाहर सुरंग बनिहाल दर्रा पर अवस्थित है।

2- धौलाधार श्रेणी (हिमाचल प्रदेश में) – धौलाधार श्रेणी को हिमाचल हिमालय भी कहते हैं तथा शिमला धौलाधार श्रेणी पर अवस्थित है।

3 – मसूरी श्रेणी (उत्तराखंड में)

– लघु हिमालय वर्ष भर हिमाच्छादित नहीं रहते हैं बल्कि गर्मी आने पर इसके चोटी के बर्फ पिघलने लगते हैं जिसके कारण इसके ढालू पर मुलायम लंबे घास के मैदान उगाते हैं अतः लघु हिमालय शीतोष्ण जलवायु क्षेत्र है इन शीतोष्ण मुलायम घास के मैदानों को जम्मू कश्मीर में मर्म के नाम से जाना जाता है (गुलमर्ग तथा सोनमर्ग) तथा उत्तराखंड में बुग्याल तथा पयाल नाम से जानते हैं।

– लघु हिमालय शीतोष्ण जलवायु प्रदेश का क्षेत्र है जिसके कारण यहां अनके स्वास्थ्य वर्धक पर्यटन क्षेत्र हैं जैसे- गुलमर्ग, सोनमर्ग, j&k, शिमला, मनाली, डलहौजी (HP), मसूरी, नैनीताल, रानीखेत, पिंडसर (UK)

– दो पर्वतों के बीच के निचले स्थल को घाटी कहते हैं।

वृहद हिमालय तथा लघु हिमालय के बीच समतल सपाट मैदान या घाटी पाई जाती हैं इन घाटियों को अलग अलग जगह पर अलग अलग नाम से जाना जाता है।

– कश्मीर घाटी – जम्मू कश्मीर (वृहद हिमालय तथा लघु हिमालय के बीच)

– कुल्लू कांगड़ा घाटी – हिमाचल प्रदेश में

-काठमांडू घाटी – नेपाल

– श्रीनगर, वूलर झील तथा डल झील कश्मीर घाटी में है।

– चुंबी घाटी सिक्किम राज्य में वृहद हिमालय तथा लघु हिमालय के बीच स्थित है।

– पूर्वी हिमालय में पश्चिमी हिमालय की तरह घाटियां नहीं पाई जाती हैं क्योंकि पूर्वी हिमालय एक दूसरे पर अध्यारोपित है, तथा इनके बीच खाली भूमि नहीं पाई जाती है।

शिवालिक हिमालय (बाह्य हिमालय)

– शिवालिक हिमालय की सबसे नवीन पर्वत श्रृंखला है तथा तीनों श्रृंखलाओं में सबसे कम ऊंचाई वाला क्षेत्र है।

– शिवालिक को अस्तित्व स्वतंत्र रूप में कोसी नदी तक ही दिखाई देती है। कोशी नेपाल से निकलकर बिहार में प्रवेश करती है तथा गंगा नदी से मिलकर बांग्लादेश में चली जाती है। कोसी के पूर्व में शिवालिक लघु हिमालय से सट गई है क्योंकि पूर्वी हिमालय बहुत संकरा है। अरुणाचल प्रदेश में शिवालिक चार अलग-अलग पहाड़ियों के रूप में बिखरा हुआ नजर आता है। डफला, मिरी, अबोर और मिश्मी (पश्चिम से पूर्व की ओर) इन पहाड़ियों का नाम यहां रहने वाली जनजाति के नाम पर रखा गया है।

लघु हिमालय तथा शिवालिक हिमालय के बीच भी घाटियाँ अर्थात समतल सपाट मैदान पाया जाता है जिसे उत्तराखंड में दुन या दार कहा जाता है।

जैसे – देहरादून एवं हरिद्वार

हिमालय का पश्चिमी मोड़ सिंधु गार्ज के पास तथा पूर्वी मोड़ दिहांग गार्ज के पास है।

गार्ज – बिल्कुल खड़े डाल वाली घाटी को आई आकार की घाटी या गार्ज कहते हैं।

– नदी पहाड़ को तब तक गहरा करती है जब तक वह समुद्र की सतह को प्राप्त न कर ले।

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9 thoughts on “लघु हिमालय और शिवालिक श्रेणी(अध्याय -7 भारत का भूगोल )

    1. धन्यवाद आलोक सर आप नहीं जानते कि आपने कितना अच्छा काम किया है आपके इन नोटस से मुझे जरूर लगने लगा है कि मैं MPPSC का एग्जाम जरूर निकाल लूंगा आपके यह नोट्स पढ़ाई में बहुत ही कारगर है मैं बहुत सालों से तैयारी करते आ रहा था परंतु जब आपके नोटस से वीडियो से पढ़ाई चालू की तब मुझे लगा की अब तक तो मैंने कुछ पढ़ा ही नहीं था आप के नोट्स हों से पढ़ कर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है और पढ़ाई में मन लग रहा है

  1. Thank you alok sir,mai abhi abhi aap ke es learning plate farm we juda huva.mai aap ki vedio dekh or bahut prbhavit huva ki mai bhi an kuch or sakta hu gov .job ke liye because cgl ki nakami ki wajah se mai bilkul khtm ho chuka that lakin an lgta hai ki aap se portal ke jariye mil kr mijhe ek ashaa ki nai kiran mili Jo ab mai RO ki preparation kruga kyoki aap ne mujhe sahas diya hai aur an mai ye jrur kruga
    Thank you sir

  2. Sir m apne notes dal ke uncountable students ki life ko value able support diya h please ap mere namste swaikar kre

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