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पृथ्वी की गति -अध्याय-3 विश्व भूगोल

घूर्णन गति

पृथ्वी अपने अक्ष पर पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है, जिसे घूर्णन गति कहते हैं। पृथ्वी अपने अक्ष पर एक चक्कर 23h 56m में लगाती हैं। घुर्णन गति को दैनिक गति या परिभर्मन गति भी कहा जाता हैं।

परिक्रमण गति

– जब पृथ्वी सूर्य के चारो तरफ एक चक्कर लगा लेती हैं तो इसे परिक्रमण गति कहते है, चुकि यह पृथ्वी एक चक्कर एक वर्ष में लगाती हैं इसलिए इसे वार्षिक गति कहा जाता हैं। पृथ्वी सूर्य की एक परिक्रमा 365 दिन 6 घण्टा में लगाती हैं।

– पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा अंडाकार कक्षा में लगाती है जिसके कारण पृथ्वी 6 महीने में सूर्य से दूर चली जाती हैं तथा फिर 6 महीने में सूर्य से नजदीक आ जाती हैं।

उपसौर तथा अपसौर

– > पृथ्वी 3 जनवरी को सूर्य के सबसे नजदीक आ जाती हैं तथा इस स्थिति को उपसौर कहते हैं।
तथा ठीक 6 महीने के बाद 4 जुलाई को पृथ्वी सूर्य से सर्वाधिक दूरी पर होती हैं तथा इस स्थिति को अपसौर कहते हैं।

:-  अगर पृथ्वी झकी नही होती तो प्रकाश वृत विषुवत रेखा सहित सभी अक्षांश रेखा को दो बराबर भागो में बाटती जिसके कारण पृथ्वी पर सभी जगह 12 घण्टे का दिन तथा 12 घण्टे की रात होती। परन्तु ऐसा नही हैं क्योंकि पृथ्वी अपने अक्ष पर 23 1/2° झुकी हुई हैं।

– > चुकी पृथ्वी के झुके रहने के स्थिति में भी प्रकाश वृत केवल विषुवत रेखा को दो बराबर भागो में बाटती हैं जिसके कारण विषुवत रेखा पर 12 घण्टे का दिन एवं 12 घण्टे की रात होती हैं। विषुवत रेखा के अलावा सभी अक्षांस रेखाओं को प्रकाश वृत असमान भागो में बाटती है जिसके कारण दिन और रात में अंतर होता हैं।

:- अतः विषुवत रेखा के उत्तर में दिन बडा एवं रात छोटी दक्षिण में दिन छोटा एवं रात बड़ी होती हैं। जिसके कारण पृथ्वी के उत्तरी ध्रुव पर 24 घँटे का दिन एवं दक्षिणी ध्रुव पर 24 घँटे की रात होती हैं। ( 6 महीने तक)

– 21 मार्च से 23 Sept – सूर्य की किरणें उतरी गोलार्ध पर अधिक
:-  23sep से 21 march – सूर्य की किरणे दक्षिणी गोलार्ध पर अधिक

– अतः विषुवत रेखा पर सदैव 12 घँटे का दिन एवं 12 घँटे की रात होती हैं। क्योंकि प्रकाश वृत सदैव विषुवत रेखा को दो बराबर भागो में बाटती हैं। ex-  कांगो देश

दिन और रात

– विषुवत रेखा के उत्तर और दक्षिण में जाने पर दिन और रात की लंबाई में अंतर बढ़ता जाता हैं।

– 21 मार्च से 23 सितंबर तक- उत्तरी गोलार्ध में दिन बड़े होंगे तथा राते छोटी होंगी तथा दक्षिणी गोलार्ध में दिन छोटा तथा रात बड़ी होगी।

23 sep to 21 march –  दक्षिण गोलार्ध में दिन बड़ा एवं रात छोटी तथा उतरी गोलार्ध में दिन छोटा एवं रात बड़ी होगी।

21 मार्च एवं 23 सितम्बर को सूर्य की किरणें विषुवत रेखा पर लम्बवत पड़ती हैं जिसके कारण पूरे पृथ्वी पर दिन रात बराबर होता हैं।

– 21 जून को सूर्य की लम्बवत किरणे कर्क रेखा पर सीधी चमकती हैं जिसके कारण इस दिन उतरी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन एवं सबसे छोटी रात होती हैं।

– 22 दिसम्बर को सूर्य की लंबवत किरणे मकर रेखा पर पड़ती हैं जिसके कारण इस दिन दक्षिणी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन एवं सबसे छोटी रात होती हैं।

– 21 मार्च को सूर्य की लम्बवत किरणे विषुवत रेखा पर पड़ती हैं जिसके कारण पूरे पृथ्वी पर दिन और रात की ल० बराबर होती हैं, इसी कारण 21 मार्च को पूरे पृथ्वी पर मौसम एक समान पाया जाता हैं।

विषुव

जब सूर्य की लम्बवत किरणे विषुवत रेखा पर पड़ती हैं, तो इसे विषुव कहा जाता है, तथा 21 मार्च को बसन्त विषुव कहा जाता हैं।

– 21 जून को सूर्य की लंबवत किरणे कर्क रेखा पर पड़ती है तथा उतरी गोलार्ध में दिन की लंबाई बढ़ जाती हैं, इसी कारण उतरी गोलार्ध में गर्मी का मौसम होता हैं।

इसके ठीक विपरीत दक्षिणी गोलार्ध में सूर्य की किरणें तिरछी तथा कम समय तक पड़ती हैं जिसके कारण दिन की लंबाई कम तथा दक्षिणी गोलार्ध में शीत ऋतु पाया जाता हैं।

– 21 जून के बाद सूर्य दक्षिणायन होने लगता है तथा 23 sep को सूर्य की किरणें विषुवत रेखा पर लंबवत पड़ती हैं जिसके कारण दोनों गोलार्ध को सूर्यताप बराबर-2 मिलता हैं जिसके कारण पूरे पृथ्वी पर मौसम एकसमान होता है। इस स्थिति को शरद विषुव कहते है।

– 23 sep के बाद सूर्य दक्षिणायन होने लगता है तथा 22 dec को सूर्य की लंबवत किरणे मकर रेखा पर पड़ने लगती है, जिसके कारण दक्षिणी गोलार्ध में दिन की अवधि लंबी तथा रात छोटी हो जाती है। जिसके कारण दक्षिणी गोलार्ध में ग्रीष्म का मौसम अनुभव होता है। तथा इसी समय उतरी गोलार्ध में सूर्य की किरणें तिरछी पड़ती है तथा कम समय तक पड़ती है जिसके कारण उतरी गोलार्ध में दिन छोटा तथा रात बड़ी होती है। तथा यहाँ शीत ऋतु का मौसम होता हैं।

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4 thoughts on “पृथ्वी की गति -अध्याय-3 विश्व भूगोल

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