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प्रायद्वीपीय भारत का पठार : भाग -3 (अध्याय -12 भारत का भूगोल )

पश्चिमी घाट पर्वत

– पश्चिमी घाट पठार का कगार है।
– पश्चिमी घाट पर्वत तापी नदी के मुहाने से शुरू होकर केपकमोरिन (कन्याकुमारी) तक जाता है।
– केप – महाद्वीप का छोर
– पश्चिमी घाट पर्वत की लंबाई 1600 किलोमीटर है।
– पश्चिमी घाट पर्वत हिमालय के बाद भारत का दूसरा सबसे लंबा पर्वत है।
– पूरी तरह से केवल भारत में विस्तृत सबसे लंबा पर्वत पश्चिमी घाट पर्वत है।
– पश्चिमी घाट पर्वत को सहयाद्री भी कहते हैं।
– पश्चिमी घाट पर्वत सही मायने में पर्वत ना होकर प्रायद्वीपीय भारत के पठार का पश्चिमी भ्रंश कगार है यह भ्रंश कगार कब बना था जब भारतीय प्लेट अफ्रीकन प्लेट से टूट कर अलग हुई थी।

पश्चिमी घाट के उत्तर में गुजरात के सौराष्ट्र में तीन पहाड़िया पाई जाती हैं।

1-  मांडव पहाड़ी – सौराष्ट्र (गुजरात का दक्षिणी भाग)
2- बारदा पहाड़ी – सौराष्ट्र (गुजरात)
3-  गिर पहाड़ी – सौराष्ट्र (गुजरात)
गिर पहाड़ी में एशियाई शेर पाए जाते हैं, जिन्हें बब्बर शेर भी कहा जाता है।

पूरे एशिया में शेर सिर्फ सौराष्ट्र के गिर पहाड़ियों पर पाए जाते हैं।

कारण ?

भारतीय प्लेट अर्थात प्रायद्वीपीय भारत अफ्रीका के प्लेट से टूटकर अलग हुआ है। और शेर अफ्रीका के शबाना के जंगल की विशेषता है।

– उत्तरी सहयाद्री की सबसे ऊंची चोटी कलसुबाई है तथा यह महाराष्ट्र में है।
– कलसुबाई चोटी के दक्षिण में पश्चिमी घाट पर महाबलेश्वर छोटी है तथा यह महाराष्ट्र में है।
– कृष्णा नदी महाबलेश्वर चोटी से निकलती है तथा पूर्व की ओर बहती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
– कर्नाटक में पश्चिमी घाट पर ब्रम्हगिरी चोटी है तथा इसी चोटी से कावेरी नदी निकलती है तथा कर्नाटक एवं तमिलनाडु में प्रवाहित होती है।
– कर्नाटक में पश्चिमी घाट पर कुद्रेमुख चोटी है।

नीलगिरी पर्वत

– दक्षिण भारत में जाकर पश्चिमी घाट पर्वत पूर्वी घाट पर्वत से मिलकर एक पर्वतीय गांठ का निर्माण करता है, इस पर्वतीय गांठ को नीलगिरी पर्वत कहते हैं।

 नीलगिरी पर्वत का विस्तार किन राज्यों में है?

तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक|

– नीलगिरी पर्वत की सबसे ऊंची चोटी डोडाबेटा है।
– डोडाबेटा चोटी दक्षिण भारत का दूसरा सबसे ऊंचा शिखर है।
– प्रसिद्ध पर्यटक स्थल ऊटी उठकमंडल तमिलनाडु में नीलगिरी पर्वत पर है।
– केरल का प्रसिद्ध सदाबहार वन या साइलेंट वैली या शांत घाटी नीलगिरी पर्वत पर है। साइलेंट वैली अपने जैव विविधता तथा घने जंगलों के लिए जाना जाता है।
– नीलगिरी पर्वत के दक्षिण में एक पर्वतीय कैंप है इस ग्रुप को पालघाट दर्रा करते हैं तथा स्थानीय भाषा में पलक्काड़ गैप कहते हैं, क्योंकि गैप के पास केरल का एक जिला पलक्काड़ है। पालघाट दर्रा के द्वारा ही केरल एवं तमिलनाडु को सड़क तथा रेल मार्ग द्वारा जोड़ा दिया गया है।
– पालघाट दर्रे के दक्षिण में एक दूसरा पर्वतीय गाठ ग्रंथी है जिसका नाम अनाईमुदी पर्वतीय गांठ है।

 अनाईमुदी पर्वतीय गांठ से 3 दिशाओं में पहाड़िया निकलती हैं।

उत्तर की ओर – अन्नामलाई पहाड़ी
दक्षिण की ओर – कार्डामम पहाड़ी
उत्तर पूर्व की ओर – पालनी पहाड़ी

– अन्नामलाई पहाड़ी की सबसे ऊंची चोटी अनाईमुदी है।
– कार्डामम पहाड़ी को इलायची पहाड़ी या इलामलय के पहाड़ी के नाम से भी जाना जाता है।
भारत का दक्षिणतम पहाड़ी
– पालनी पहाड़ी मुख्य रूप से तमिलनाडु में विस्तृत है प्रसिद्ध पर्यटक स्थल कोडाइकनाल तमिलनाडु में पालनी पहाड़ी पर है।
– अनामलाई एवं कार्डमम पहाड़ी केरल एवं तमिलनाडु के सीमा पर है।
– पश्चिमी घाट पर्वत पर जगह-जगह दर्रे या गैप पाए जाते हैं इन दर्रे से होकर पश्चिमी घाट पर्वत को आर पार करने में सहायता मिलती है।
1- थाल घाट दर्रा – पश्चिमी घाट पर महाराष्ट्र में
– मुंबई से नागपुर जाने वाली सड़क थाल घाट दर्रा से गुजरती है।
2- भोर घाट दर्रा – पश्चिमी घाट पर महाराष्ट्र में
– मुंबई से पुणे जाने वाली सड़क भोरघाट दर्रा से गुजरती है।
–  N H 4 मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, चेन्नई सड़क मार्ग भी भोर घाट दर्रा से गुजरता है।
3- पालघाट दर्रा – केरल में नीलगिरी पर्वत के दक्षिण में तथा अनामलाई पहाड़ी के उत्तर में,
4- सेनकोट्टा गैप या दर्रा – कार्डामोम पहाड़ी पर केरल में
– तिरुवंतपुरम से मदुरै (तमिलनाडु) जाने वाली सड़क मार्ग सेनकोट्टा गेस से गुजरती है।

पूर्वी घाट पर्वत

– पूर्वी घाट पर्वत पश्चिमी घाट पर्वत की तरह क्रमबद्ध व निरंतर ना होकर जगह जगह कटा छटा हुआ है।
–  इसका कारण यह है कि प्रायद्वीपीय भारत के पठार की ढाल पूर्व (पूरब) की तरफ है जिसके कारण प्रायद्वीपीय भारत के पठार की अधिकांश नदियां पश्चिमी घाट पर्वत से निकलकर पूर्वी घाट पर्वत की तरफ बहती हैं, इन नदियों ने पूर्वी घाट पर्वत को काट छांट दिया है ।
उदाहरण के लिए गोदावरी और कृष्णा नदी के डेल्टा के बीच में पूर्वी घाट पर्वत बिल्कुल गायब है। यही कारण है कि पूर्वी घाट पर्वत को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है।
नल्लामलाई – आंध्र प्रदेश
पालकोंडा – आंध्र प्रदेश
वैलीकोंडा – आंध्र प्रदेश
शेषाचलम पहाड़ी – तेलांगना
जावादी – तमिलनाडु
शेवाराय – तमिलनाडु
पंचामलाई – तमिलनाडु
सिरुमलाई – तमिलनाडु

– तमिलनाडु की पहाड़ियां चारकोनाइट चट्टानों से बनी हुई है।
– नीलगिरी पर्वत समेत तमिलनाडु की पहाड़ियों पर चंदन और सागवान बहुतायत मात्रा में पाए जाते हैं।

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